लव कुश रामायण

लव कुश रामायण (Love Kush Ramayan)

रामचरितमानस में कुल 7 कांड वर्णित हैं. इन कांडो में भगवान राम के जन्म से लेकर उनके 14 साल के वनवास और रावण के विनाश करने के बारे में कईं कथाएँ दर्ज़ हैं. ऋषि वाल्मीकि ने रामचरितमानस की रचना की थी. उनकी इस रचना में उन्होंने भगवान राम के पूरे जीवन को वर्गीकृत किया. हालंकि लव कुश रामायण में शामिल नहीं हैं लेकिन जब भी भगवान राम का नाम आता है तो उनके दोनों पुत्रों का नाम भी आवश्य याद किया जाता है. वाल्मीकि जी के बाद बहुत से ऋषि विद्वानों ने भगवान राम और लव कुश सम्बन्धित गाथाएं लिखी लेकिन इनमे से सबसे अधिक लोकप्रिय वाल्मीकि जी की रामायण है. इसमें उन्होंने भगवान राम के कोमल हृदय और जीवन के बारे में बताया है. आज के इस ख़ास लेख में हम आपको लव कुश रामायण के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप में से अधिकतर लोग नहीं जानते होंगे.
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रामयण की कथा हिंदू धर्म में सबसे अधिक प्रचलित हैं. इसमें भगवान राम के जन्म, सीता माँ के साथ विवाह, बनवास काटना और रावण का अंत करने की हर कथा मिलती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान राम और सीता माँ के दो जुदा पुत्र भी थे? जी हाँ, राम और सीता के दो पुत्र थे जिनमे से एक का नाम लव और दुसरे का नाम कुश था. लव कुश रामायण का हिस्सा नहीं हैं लेकिन इनका सही वर्णन हमें केवल बाल्मीकि रामायण में ही मिलता है. बाल्मीकि जी के बाद लव कुश रामायण कांड को कईं महान ऋषि विद्वानों ने लिखने की सोची. इस लेख में हम आपको लव कुश के जन्म के बारे में सच्ची कथा बताने जा रहे हैं जिसका प्रमाण हमे बाल्मीकि ग्रन्थ से मिलता है.

लव कुश रामायण- सीता माँ का अयोध्या छोड़ना

रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद जब श्री राम सीता माँ के साथ 14 वर्षों बाद वापिस अयोध्या लौटे तो सब तरफ खुशियों का माहोल बन गया. लोगों ने भगवान राम के लौटने पर दीपक जला कर अपनी ख़ुशी को ज़ाहिर किया. उस समय उनकी खुशियाँ और भी बढ़ गई जब उन्हें पता चला कि सीता माँ पेट से हैं और जल्द ही एक नन्हे मेहमान की किलकारियां गूंजने वाली हैं. सीता माँ के गर्भवती होने की बात सुन कर स्वयं भगवान राम भी बेहद खुश थे लेकिन उनकी खुशियाँ ज्यादा समय तक नहीं टिकेंगी, ऐसा उन्होंने सोचा नहीं था. लोगों ने सीता माँ के लंका रह कर लौटने के कारण उनके गर्भवती होने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. जिस पर सीता माँ को काफी धक्का लगा और उन्होंने अपने राज्य की भलाई के लिए अयोध्या छोड़ने का फैसला ले लिया.

लव कुश रामायण- सीता माँ का बाल्मीकि आश्रम जाना

दुनिया में रामायण के इलावा भी कईं अन्य ग्रंथ मौजूद हैं जिसमे भगवान राम के बनवास से और उनके जीवन से जुडी कईं कहानियों का ज़िक्र मिलता है लेकिन इसी बीच कुछ कहानियां ऐसी भी हैं जिनका हमे कोई पक्का प्रमाण नहीं मिलता. इन्ही में से लव कुश रामायण कथा भी एक है. बता दें कि रावण की कैद से रिहा होने के बाद जब सीता माँ राम के साथ वापिस राज्य पहुंची तो चरों और उनके गर्भवती होने की सूचना फ़ैल गई जिसके बाद भगवान राम भी बेहद खुश हुए. लेकिन उनकी यह खुशियाँ अधिक समय तक नहीं टिकने वाली थी.

लव कुश रामायण- लव का जन्म

आश्रम रहते रहते ही सीता माँ को अनुभव हुआ कि वह बच्चे को जन्म देने वाली हैं. ऐसे में उनका अयोध्या से कोई संपर्क नहीं था तो उन्होंने अपने बच्चे के पालन पोषण की जिम्मेदारी खुद निभाने की सोची. इसी बीच उन्होंने एक सुंदर बालक को जन्म दिया जिसका नाम लव रखा गया. लोक कथाओं के अनुसार सीता माँ ने एक साथ दो पुत्रों को जन्म दिया लेकिन रामायण में इसका कोई जिक्र नहीं मिलता. लव के जन्म के बाद सीता माँ का पूरा दिन लव के पालन पोषण में बीतने लगा. एक दिन सीता माँ आश्रम से बाहर किसी काम के लिए गई. उन्होंने बाल्मीकि जी को लव की देखभाल करने को कहा. परंतु सीता माँ ने देखा कि बाल्मीकि जी व्यस्त हैं तो वह चुप चाप लव को अपने साथ ले गयी. जब बाल्मीकि जी ने लव को आश्रम में नहीं पाया तो वह चिंतित हो गए. उन्होंने सोचा कि लव को किसी जंगली जानवर ने खा लिया है. ऐसे में वह सीता माँ के लौटने पर उन्हें क्या जवाब देंगे.

लव कुश कांड- कुश का जन्म

बाल्मीकि जी ने लव की गैर-उपस्तिथि में एक घास पर मंत्र तंत्र करके एक नया लव बना दिया. उन्होंने सोचा कि सीता माँ के लौटने पर वह इस लव को सीता माँ के हवाले कर देंगे. लेकिन जब सीता माँ लौटी तो उनके साथ असली लव को देख कर वह द्दंग रह गए और दुसरे पुत्र के जन्म के बारे में सारा सच बता दिया. जिसके बाद से उस पुत्र का नाम कुश रखा गया. तभी से  love kush ramayan के कांडो का एक अहम हिस्सा बन गए.

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