माँ दुर्गा की महिमा

माँ दुर्गा की महिमा


माँ दुर्गा कवच में फलश्रुति का मतलब ऐसे श्लोकों से है, जिनके जाप करने से मनुष्य को शुभ फल की प्राप्ति होती है. इन सभी श्लोकों में भगवान ब्रह्मा देवी पार्वती की उनके अलग-अलग नौ रूपों की प्रशंसा करते हैं और साथ ही हर देवी को कवच पढ़ कर देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त करने का अनोरोध करते हैं. ब्रह्मा जी के कहे अनुसार जो भी इन श्लोकों का नियमित रूप से जाप करता है, उसे स्वयं दुर्गा माँ का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है.
माँ दुर्गा की महिमा के गुणगान सदियों से किए जाते रहे हैं. हिंदू धर्म की कथाओं के अनुसार दुर्गा माँ सबसे शक्तिशाली देवी हैं जोकि अपने 9 रूपों में आकर संसार को एक नई दिशा दे गई. माँ दुर्गा ने महिषासुर जैसे दानव का अंत करके बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी. तब से लेकर आज तक हर कोई माँ दुर्गा की महिमा पर विश्वास करता आया है.

कैसी दिखती है दुर्गा माँ?

माँ दुर्गा की महिमा और उनके क्रोध से तो आज हर कोई वाकिफ ही है. माँ दुर्गा ने दुष्ट दांव महिषासुर का अंत किया था और उसके अहंकार का नाश किया था. इसलिए दुर्गा माँ को बुराई पर अच्छाई की जीत दिलवाने वाली माता कहा जाता है. दुर्गा माँ की पहचान की बात की जाए तो वह शेर या बाघ पर सवार रहने वाली एक भव्य योध्हा हैं. उनके इस अवतार को अभय मुद्रा कहते हैं. पुराणिक ग्रंथों से पता चला है कि माँ दुर्गा के 8 या 10 हाथ हैं जो कि चतुर्भागों  अर्थात दस दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. माँ दुर्गा की महिमा इतनी शक्तिशाली है कि वह अपने हर हाथ से अपने भक्तों की रक्षा करती हैं.

माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान

हमारे भारत देश में माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करने के लिए और उनकी पूजा आराधना करने के लिए नवरात्र का पर्व मनाया जाता है. नवरात्र हर साल चार बदलते मौसमों के साथ आते हैं. जिनमे से दो नवरात्र गुप्त हैं जबकि अन्य दो नवरात्र बहाद धूम-धाम से मनाए जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान इन नवरात्रि के 9 दिनों के पूजन के दौरान करता है, उस पर माँ की कृपा सदैव बनी रहती है.

दुर्गा माँ की आराधना

माँ दुर्गा की महिमा और पूजन के लिए हिंदू धर्म में कुछ विशेष नियम और रीति रिवाज़ बनाए गए हैं. ऐसे में प्पोजं के सभी दिनों में पवित्रता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है.
  • नवरात्रि में माँ दुर्गा की महिमा और पूजन में लाल रंग को मुख्य रखें. लाल रंग माँ को सबसे अधिक पसंद है.
  • दुर्गा माँ का पाठ करने के बाद दुर्गा चालीसा का जाप करें.
  • सुबह शाम घर के मंदिर में घी के दीए जलाएं.
  • हर दिन माँ दुर्गा की महिमा के लिए उन्हें पुष्प अर्पित करें.
  • कन्या पूजन के दौरान किसी कन्या को खाली हाथ घर से विदा न करें.

देवी के भिन्न नाम है ये श्लोक

पनदिर श्री रवि शंकर जी के अनुसार माँ दुर्गा कवच के सभी श्लोक देवी माँ के भिन्न भिन्न नामों को दर्शाते हैं. साथ ही यह मनुष्य शरीर के अलग-अलग अंगों पर आधारित हैं. येलगभग योगनिद्रा जैसा ही है, परंतु नामों से युक्त है. माँ दुर्गा कवच के सभी मंत्र और श्लोकी प्रतिकूल कंपन को अधिक साकराताम्क बनाते हैं.

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