शिलाजीत
शिलाजीत
भारत से लेकर दुनियाभर में आयुर्वेद चिकित्सा पद्दति का विशेष महत्व है। आज हम आपको जिस वस्तु के बारे में बताने जा रहे हैं, उसे आयुर्वेद ग्रंथ में सबसे अहम औषिधि माना गया है। जी हां, यह वस्तु कोई और नही बल्कि शिलाजीत है। शिलाजीत मुख्य रूप से हिमालय की पहाड़ियों से निकलने वाला एक लसलसेदार पदार्थ है जोकि कईं बीमारियों को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दिखने में शिलाजीत काले व भूरे रंग का एक चारकोल होता है लेकिन यह लंबी उम्र के लिए किसी वरदान से कम नही है। बड़े बजुर्ग शिलाजीत को ऊर्जा और शक्ति का स्रोत मानते आए हैं। आज हम आपको शिलाजीत के फायदे, नुकसान और इसको खाने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।
शिलाजीत के फायदे
शिलाजीत शारीरिक और मानसिक दोनों की गतिविधियों को अनुकूल रखने में मदद करता है। शिलाजीत के फायदों के चलते आयुर्वेद में इसका विशेष महत्व है। चलिए जानते हैं शिलाजीत हमारे किस किस काम आ सकता है-
शरीर को दे भरपूर ऊर्जा
शिलाजीत के नियमित रूप से सेवन करने पर हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके सेवन से शरीर की रोगनाशक क्षमता दुगुनी हो जाती है जिससे हम रोग मुक्त रहते हैं। इसमे मौजूद एंटीऑक्सीडेंट खतरनाक तत्वों से लड़ कर हमें दरुस्त रखते हैं।
दिमाग को करे तेज़
शिलाजीत ना केवल आपकी शारीरिक कमजोरी को दूर करता है, बल्कि इसमे विशेष तरह की न्यूरोप्रोटेक्टेव क्षमता होती है जोकि मस्तिष्क को बढ़ावा देने में मदद करती है। साथ ही जिन लोगों को अल्जाइमर जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए शिलाजीत का सेवन किसी चमत्कारी बूटी से कम नही है।
इम्यून सिस्टम को रखे मजबूत
शिलाजीत में मौजूद पौषक तत्व हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत रखते हैं और साथ ही हमारी पाचन क्रिया को दरुस्त रखते हैं। यह शरीर की विभिन्न प्रकार की प्रणालियों को नियंत्रित करता है साथ ही हार्मोन का संतुलन बनाये रखने में मददगार है।
शिलाजीत के नुकसान
शिलाजीत एक लसलसेदार पदार्थ है जोकि आम तौर पर गर्मियों में पिघल कर निकलता है। इसलिए शिलाजीत की कीमत को कोई भी व्यक्ति आसानी से अफ़्फोर्ड कर सकता है। शिलाजीत जरूरत से अधिक खाने से नीचे दिए गए दुषोर्भाव हो सकते हैं-
– शरीर मे उतेजना या गर्मी महसूस होना
– यदि की मात्रा अधिक हो अजय तो शरीर में उतेजना और अत्यधिक गर्मी बनी रहती है.
– कुछ लोगों को शिलाजीत के सेवन से हाथ एवं पैरों में दर्द या सूजन महसूस होने लगती है.
– शिलाजीत की मात्रा सही न होने से पेशाब में वृद्धि या कमी आ सकती है.
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