चंद्रगुप्त मौर्य की जीवनी


इतिहास के पन्नों में चंद्रगुप्त मौर्य का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है. चंद्रगुप्त मौर्य एक महान शासक थे. इन्होनें अपने दुश्मनों के आगे कभी भी घुटने नहीं टेके.

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म
चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म बिहार के पाटलिपुत्र गाँव में हुआ था. उनके पिता का नाम नंदा और माता का नाम मुरा था. कहा जाता है कि राजा चंद्रगुप्त मौर्य परिवार के शासक थे. चाणक्य उनके गुरु थे. उन्होने चंद्रगुप्त का जीवन बदल दिया. चाणक्य ने चंद्रगुप्त को ज्ञानी, समझदार और बुद्धिमान बनाया. चंद्रगुप्त मौर्य की पहली पत्नी दुर्ध्या थी. उनके बेटे का नाम बिंदुसार था. दूसरी पत्नी का नाम था हेलेना था. उनसे उन्हें जस्टिन नाम का बेता हुआ था.

मौर्य समाज की स्थापना
मौर्य समाज की स्थापना में चाणक्य का बहुत बड़ा हाथ है. चाणक्य ने चंद्रगुप्त से वादा किया था कि वह उनका राज्य उन्हें सौंपेंगे. चाणक्य ने सभी राजाओं से मदद माँगी थी. चाणक्य ने सभी राजाओं से मदद माँगी थी. उसके बाद पंजाब के राजा ने सिकंदर से युद्ध किया, इस युद्ध में पंजाब के राजा को हर का सामना करना पड़ा था. उसके बाद चाणक्य ने नंद समाज के शासक धनानंद से मदद माँगी, उन्होने मदद के लिए मना कर दी. उसके बाद चाणक्य ने अपना साम्राज्य बनाने का सोचा. उसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर को चाणक्य नीति से हराया था.

चाणक्य नंदा वंश का नाश करना चाहते थे. इस काम के लिए उन्होनें चंद्रगुप्त मौर्य का साथ माँगा. दोनों ने मिल कर एक सैना तैयार की थी. उसके बाद उन्होनें नंद वंश पर आक्रमण किया था. इसके बाद इनकी सैना नें मग्ध पर भी आक्रमण किया लेकिन असफलता हाथ लगी और वहाँ से भाग गये.

चंद्रगुप्त ने एक नयी रणनीति बनाई. वह अपनी सैना के साथ धीरे धीरे मग्ध में प्रवेश करने लगे. रास्ते में जीतने भी जिले आए चंद्रगुप्त ने उन सभी जिलों को जीत लिया था. सभी जिलें चंद्रगुप्त के साथ मिल गये थे. कुछ समय बाद चंद्रगुप्त ने मग्ध पर हमला बोल दिया. अंत में जा कर चंद्रगुप्त की जीत हुई.

चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु
चंद्रगुप्त की मृत्यु 298 में कर्नाटक  में हुई थी. जब उनकी मृत्यु हुई तब वह मात्र 42 साल के थे.

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