गायत्री मंत्र का महत्व
हिंदू
धर्म में गायत्री माँ को वेदमाता कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि के चारों
वेद गायत्री माँ की उत्पत्ति से ही बनाए गए हैं. शायद
इसलिए लोग गायत्री माँ को भारतीय संस्कृति की जननी कह कर बुलाते हैं. ऐसे में यदि आप जिंदगी में किसी भी समस्या या परेशानी में उलझे
हुए हैं तो गायत्री मंत्र का जाप आपको सभी बाधाओं से मुक्ति दिलाने में काम आ सकता
है. गायत्री माँ के अवतरण के कारण गायत्री मंत्र का महत्व बेहद ख़ास है. धर्म
ग्रंथों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति गायत्री मंत्र के महत्व को समझता है और नियमित
रूप से इन मन्त्रों का जाप करता है तो उसकी हर प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती
हैं. गायत्री से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस के सात प्रतिफल अथर्ववेद में बताए गए हैं, जो विधिपूर्वक उपासना करने वाले हर साधक को निश्चित ही प्राप्त
होते हैं.
कहा जाता है कि विधि विधान से गायत्री मंत्र
की उपासना एवं सिद्धि करने से गायत्री माँ स्वयं एक रक्षा कवच का निर्माण हमारे चारों ओर कर
देती हैं जो हमे विभिन्न प्रकार की विपत्तियों से बचाने में मदद करता है. जो भक्त गायत्री मंत्र का महत्व समझता है, वह कभी भी गलत रास्ते पर नहीं चलता.
गायत्री मंत्र का अर्थ
गायत्री मंत्र का महत्व जानने से पहले आपको
इस मंत्र के अर्थ जानना बेहद आवश्यक है.
गायत्री मंत्र निम्नलिखित है-
ऊँ भूर्भुव: स्व:
तत्सवितुर्वरेण् यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो न: प्रचोदयात् !
गायत्री मंत्र का अर्थ: गायत्री मंत्र का
उचार्ण करते समय हम सभी भगवान से कहते हैं कि, हे
प्रभु, एक तुम ही तो हो जिसने हमे जीवन दान दिया
और सभी कष्ट हर कर हमारे दुखों का निवारण किया. तुम्हारे कारण
ही हमारी जिंदगी में खुशहाली है. हे
सृष्टि के रचनकर्ता, काश! हमे आपकी पाप नष्ट करने वाली रौशनी प्राप्त हो जाए. काश आप हमे सच्चाई का मार्ग दिखा कर हमे प्रेरित करें ताकि हम
अपनी प्रतिभा को सही दिशा की ओर ले जा सकें.

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