शिव तांडव स्त्रोत के लाभ है चमत्कारी, हर मनोकामना होगी पूरी
शिव
तांडव स्त्रोत के लाभ: हिंदू धर्म में भगवान शिव को महाकाल के नाम से जाना जाता है. कहते हैं जब मह्काल किसी पर दया दिखाते हैं तो उसको सारे जहां की खुशियाँ दे देते हैं. लेकिन वहीँ अगर उन्हें
कोई क्रोधित कर दे तो वह अपनी तीसरी विनाशकारी आँख खोलने से कन्नी नहीं कतराते.
सदियों पहले रावण ने अपने भाई का पूरा राजपाठ छीन कर लंका को अपनी जागीर बना लिया
था. वह उस समय अहंकार में इतना चूर था कि सबको नीच समझता था. ऐसे समय में शिव
भगवान ने उसके अहंकार का नाश किया. कहा जाता है कि रावण शिव का सच्चा भक्त था.
उसने शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्त्रोत की रचना की थी. उसकी भक्ति से
खुश होकर स्वयं महाकाल ने उसको एक शिवलिंग भेंट किया था जो उसकी ताकत को और अधिक
बढ़ावा देता था. इस लेख में हम आपको रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र के लाभ और
शिव तांडव श्लोक बताने जा रहे हैं.
एक कथा के अनुसार शिव भगवान अपनी पत्नी के साथ कैलाश पर्वत पर रहा करते थे. एक दिन रावण वहां से गुजरा तो उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की सोची. रावण की तमाम कोशिशों के बाद भी वह ऊपर चढ़ने में नामकामयाब हुआ. लेकिन उसके बल के कारण पर्वत बुरी तरह से हिलने लगा. शिव को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने रावण के हाथ का अंगूठा पर्वत के नीचे दबा दिया. रावण को एक महर्षि ने इस श्राप से मुक्ति के लिए शिव की साधना करने की सलाह दी. महर्षि की बात सुन कर रावण ने 1000 वर्षों तक शिव तांडव स्त्रोत का जाप किया और श्राप से मुक्ति हासिल की.
क्या है शिव तांडव स्त्रोत?
दरअसल, शिव तांडव स्त्रोत कुछ श्लोकों पर आधारित है. हिंदी में तांडव को नाच कहा जाता है. ऐसे में शिव तांडव एक प्रकार का नाच है जो कि क्रोध में किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि उर्जा से भरे इस शिव तांडव स्त्रोत के अनेकों लाभ हैं और इसे करने से व्यक्ति हर परिस्तिथि पर काबू पाना सीख सकता है.गौरतलब है कि शिव तांडव स्त्रोत की अनुमति केवल मर्दों को ही दी गयी है. औरतों के लिए यह तांडव वर्जित किया गया है.
एक कथा के अनुसार शिव भगवान अपनी पत्नी के साथ कैलाश पर्वत पर रहा करते थे. एक दिन रावण वहां से गुजरा तो उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की सोची. रावण की तमाम कोशिशों के बाद भी वह ऊपर चढ़ने में नामकामयाब हुआ. लेकिन उसके बल के कारण पर्वत बुरी तरह से हिलने लगा. शिव को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने रावण के हाथ का अंगूठा पर्वत के नीचे दबा दिया. रावण को एक महर्षि ने इस श्राप से मुक्ति के लिए शिव की साधना करने की सलाह दी. महर्षि की बात सुन कर रावण ने 1000 वर्षों तक शिव तांडव स्त्रोत का जाप किया और श्राप से मुक्ति हासिल की.
क्या है शिव तांडव स्त्रोत?
दरअसल, शिव तांडव स्त्रोत कुछ श्लोकों पर आधारित है. हिंदी में तांडव को नाच कहा जाता है. ऐसे में शिव तांडव एक प्रकार का नाच है जो कि क्रोध में किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि उर्जा से भरे इस शिव तांडव स्त्रोत के अनेकों लाभ हैं और इसे करने से व्यक्ति हर परिस्तिथि पर काबू पाना सीख सकता है.गौरतलब है कि शिव तांडव स्त्रोत की अनुमति केवल मर्दों को ही दी गयी है. औरतों के लिए यह तांडव वर्जित किया गया है.
शिव तांडव स्त्रोत के लाभ
- रावण द्वारा रचित पाठ को शिव तांडव स्त्रोत के नाम से जाना जाता है. शिव तांडव स्त्रोत के लाभ बेहद चमत्कारी हैं. यदि इसके श्लोकों का जाप सच्चे मन से किया जाए तो मनुष्य की हर चिंता और परेशानी हमेशा के लिए मिट जाती है. इसकी स्तुति से ना केवल धन बल्कि रचनात्मक और कलात्मक निपुणता भी पाई जा सकती है.
- अगर आपकी किसी समस्या का उचित समाधान नहीं निकल पा रहा हो तो शिव तांडव स्त्रोत के लाभ आपके लिए अति उत्तम साबित हो सकते हैं.
- आर्थिक और मानसिक कमजोरी से बचने के लिए शिव तांडव स्त्रोत प्रभावी है. यह आपकी सभी परेशानियाँ और तनाव दूर कर सकता है. बुरे ग्रह के दोष से मुक्ति पाने के शिव तांडव का पाठ करना अत्यधिक लाभकारी होता है.
शिव
तांडव श्लोक
शिव तांडव स्त्रोर को 17 श्लोकों में बांटा गया है. इनमे से कुछ श्लोकों का वर्णन
निम्नलिखित है-
जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां
भुजंगतुंगमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
जटा कटा हसंभ्रम
भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं
ममं ॥2॥
धरा धरेंद्र नंदिनी विलास
बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु
वस्तुनि ॥3॥
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